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1998 तक सिर्फ 16 वर्ग फीट में सिमटा उदयपुर का करीब 900 वर्ष पुराना रानी रोड स्थित महाकालेश्वर मंदिर विशालता के साथ-साथ स्मार्ट मंदिर बनने जा रहा है। मंदिर के परिक्रमा मार्ग में एक्युप्रेशर टाइल्स लगेंगी। ताकि धर्म-कर्म के साथ आरोग्य में भी वृद्धि कर सकें। यहां अंडर ग्राउंड बिजली और ड्रेनेज सिस्टम आदि तैयार हो रहा है।

गर्भ गृह में शिव पंचायत बनेगी। जहां भगवान विष्णु, सूर्य, गणेश और मां दुर्गा को स्थापित किया जाएगा। सार्वजनिक प्रन्यास मंदिर श्री महाकालेश्वर मंदिर के सचिव चंद्रशेखर दाधीच ने बताया कि मंदिर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में नव गृह मंडल बनेगा, जहां कई दशकों बाद फिर से उज्जैन की तरह काल गणना होगी।

मुख्य मंदिर की लगभग 45 हजार वर्ग फीट की परिधि में 500 से ज्यादा आकर्षक फव्वारे तैयार हो गए हैं। इनको भव्यता देने के लिए संगमरमर के 32 हंस, 24 हाथी और 8 मोरों की आकृति के फव्वारे भी बनाए जा रहे हैं। शिव गुफा, गृह मंडल स्थान, नक्षत्र वाटिका, नौ कुंडीय यज्ञशाला आदि इसी साल बनकर तैयार होंगे। यहां प्रन्यास के 8 हजार सदस्य हर माह न्यूनतम 100 रुपए मंदिर निर्माण के लिए सहयोग राशि देते आ रहे हैं। इसी में से यह खर्च होगा।नौ देवों की सवा-सवा फीट ऊंची उनके मूल स्वरूप की प्रतिमाएं होंगी स्थापित मंदिर के ईशान कोण में बनने वाले नव गृह मंडल में नौ देवों की सवा-सवा फीट ऊंची उनके मूल स्वरूप (रंग) की प्रतिमाएं स्थापित होंगी।

इसके लिए 729 वर्ग फीट का प्लेटफार्म तैयार हो गया है। स्थापना इसी वर्ष दक्षिण भारत के विद्वान ज्योतिष आदि के निर्देशन में विधिवत होगी। इसके बाद यहां गृह-नक्षत्रों पर शोध होंगे। शोध प्रकाशन केंद्र की स्थापना होगी। फिलहाल ज्योतिष, शास्त्र, कला आदि की अध्ययन सामग्री के लिए पुस्तकों का संग्रह शुरू कर दिया है। गुफा में बहुरंगी रोशनी, बहते पानी में शिव लीला के होंगे दर्शन गत वर्ष 2016 में बने मंदिर के पूर्व द्वार के सामने स्थित पहाड़ी में 1000 फीट लंबी आकर्षक भोलेनाथ की गुफा बनाई जा रही है। 10 फीट ऊंची और 10 फीट चौड़ी यह गुफा महाकाल के गंगा घाट तक जाएगी।

इसमें 1 फीट कलकल बहते जल में श्रद्धालु और पर्यटक भगवान शिव की लीलाओं को बहुरंगी रोशनी में जीवंत दर्शन करेंगे। पहले यहां तैयार होता था मेवाड़ पंचांग, स्पष्ट दिखते हैं गृह-नक्षत्र प्रताप गौरव केंद्र के अध्यक्ष प्रो. केएस गुप्ता और सचिव दाधीच ने बताया कि इस 900 वर्ष पुराने मंदिर के परमार राजवंश कालीन होने के साक्ष्य मिलते हैं। यह उज्जैन की भांति काल गणना केंद्र हुआ करता था। क्योंकि उज्जैन का उत्तर अक्षांश 23/11 और उदयपुर का उत्तर अक्षांश 24/35 है।

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